साइबर अपराध नियंत्रण एवं साइबर ठगी की धनराशि की शीघ्र वापसी को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक

देहरादून

देहरादून में आज मुख्य सचिव उत्तराखण्ड आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत एवं धनराशि की शीघ्र वापसी तथा Money Restoration Module (MRM) एवं Grievance Redressal Mechanism (GRM) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में गृह सचिव  शैलेश बगोली, पुलिस महानिरीक्षक साइबर नीलेश आनन्द भरने, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF  अजय सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक एवं कार्यालय प्रमुख  हर्ष कुमार गौतम सहित विभिन्न बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे

बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक साइबर  शान्तनु पाराशर द्वारा साइबर वित्तीय अपराधों, MRM एवं GRM की वर्तमान स्थिति, लंबित प्रकरणों, धनराशि की वापसी तथा बैंकिंग संस्थानों की भूमिका के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में केवल धनराशि को होल्ड/लियन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र पीड़ितों को उक्त धनराशि की वास्तविक एवं शीघ्र वापसी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। MRM के माध्यम से पात्र पीड़ितों को होल्ड/लियन की गई धनराशि वापस दिलाने तथा GRM के माध्यम से बैंक खातों के फ्रीज, लियन एवं होल्ड से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाता है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 1930 हेल्पलाइन एवं National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि ठगी की धनराशि को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके तथा पात्र पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सके।

बैठक में म्यूल अकाउंट एवं संदिग्ध बैंक खातों की पहचान, ATM एवं चेक निकासी हॉटस्पॉट की निगरानी, संदिग्ध लेन-देन की शीघ्र पहचान तथा आवश्यक KYC, CCTV फुटेज एवं ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEA) के साथ समयबद्ध रूप से साझा किए जाने पर विशेष जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की प्रकृति को देखते हुए उत्तराखण्ड पुलिस, बैंकिंग संस्थान, RBI एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय एवं त्वरित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सक्षम नोडल अधिकारियों की व्यवस्था तथा 24×7 सहायता एवं त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाए जाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में 1930 हेल्पलाइन, NCRP, MRM एवं GRM के संबंध में आमजन में व्यापक जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया गया। आमजन से अपील की गई कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने की स्थिति में बिना विलंब 1930 पर शिकायत दर्ज करें, जिससे समय रहते धनराशि को होल्ड कर पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

मुख्य सचिव ने  मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के अपराध मुक्त एवं सुरक्षित उत्तराखण्ड के विजन के अनुरूप साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं संस्थानों को संयुक्त, समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।*

बैठक में निर्णय लिया गया कि साइबर ठगी की धनराशि की शीघ्र वापसी, म्यूल एवं संदिग्ध खातों की पहचान, ATM/चेक निकासी हॉटस्पॉट पर कार्रवाई, बैंकिंग समन्वय एवं जन-जागरूकता के लिए सभी संबंधित संस्थान आपसी समन्वय से प्रभावी एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

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