मुख्यमंत्री आवास में लोकपर्व फूलदेई, हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पारंपरिक परिधान पहनकर आए बच्चों ने घर की देहरी पर फूल व चावल अर्पित किए और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई, जतुके दियाला- उतुके सई” जैसे लोकगीत गाए। मुख्यमंत्री ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकपर्व फूलदेई राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान के भाव को बनाए रखने का त्योहार है। उन्होंने कहा यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है। यह त्योहार दर्शाता है कि जीवन में हमेशा प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा हमने अपने लोक त्योहारों को धूमधाम से मनाना चाहिए जिससे कि यह त्यौहार आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे और हमारी लोक संस्कृति हमेशा अमर रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, बसंत के स्वागत और हमारी लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला फूलदेई पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों को इन अमूल्य परंपराओं से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर श्रीमती गीता पुष्कर धामी भी मौजूद रहीं।

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