देहरादून
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में आयुष विभाग के अन्तर्गत प्रदेश में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के क्षेत्र में प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, उत्तराखण्ड प्राकृतिक रूप से अत्यधिक समृद्ध राज्य है, यहां का वातावरण भी आयुष को बढ़ावा दिए जाने के लिए अनुकूल है। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद को अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ बना सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में जगह के अनुरूप हर्बल गार्डन विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों के साथ उनके सम्बन्ध में जानकारी भी उपलब्ध करायी जा सकती है। आयुर्वेदिक अस्पतालों का स्वरूप भी इस प्रकार का रखा जाए, जिससे वहां का वातावरण शांत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को परिभाषित करता हो। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में प्राईवेट इन्वेस्टर्स को भी बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से कैंसर अन्य विभिन्न रोगों का इलाज कर रहे प्राईवेट संस्थानों को प्रदेश में निवेश एवं अपने अस्पताल खोले जाने हेतु आमंत्रित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऐलोपैथी के समान आयुष में टेलीमेडिसिन को अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में आयुर्वेद और होम्योपैथी के फायदे के सम्बन्ध में अधिक से अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। इसके लिए अधिक से अधिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा कर रहे संस्थानों को अपने चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान कराते हुए लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वेलनेस सेंटर्स को कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी खोला जाना चाहिए। इससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले सकेंगे और इसकी उपयोगिता को समझ कर अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुष विभाग को आने वाले वर्षों के लिए अपना प्लान तैयार करना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद की शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए भी शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिए जाने की बात कही।
इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में जगह के अनुरूप हर्बल गार्डन विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों के साथ उनके सम्बन्ध में जानकारी भी उपलब्ध करायी जा सकती है। आयुर्वेदिक अस्पतालों का स्वरूप भी इस प्रकार का रखा जाए, जिससे वहां का वातावरण शांत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को परिभाषित करता हो। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में प्राईवेट इन्वेस्टर्स को भी बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से कैंसर अन्य विभिन्न रोगों का इलाज कर रहे प्राईवेट संस्थानों को प्रदेश में निवेश एवं अपने अस्पताल खोले जाने हेतु आमंत्रित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऐलोपैथी के समान आयुष में टेलीमेडिसिन को अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में आयुर्वेद और होम्योपैथी के फायदे के सम्बन्ध में अधिक से अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। इसके लिए अधिक से अधिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा कर रहे संस्थानों को अपने चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान कराते हुए लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वेलनेस सेंटर्स को कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी खोला जाना चाहिए। इससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले सकेंगे और इसकी उपयोगिता को समझ कर अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुष विभाग को आने वाले वर्षों के लिए अपना प्लान तैयार करना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद की शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए भी शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिए जाने की बात कही।
इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

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