देहरादून: आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पंचायतों में सतत विकास लक्ष्य के उद्देश्यों को हासिल करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकासोन्मुखी एजेंडे को गांव-गांव पहुंचाने के लिए सोमवार को अनुपयोगी भूमि के संवर्धन एवं पौधरोपण के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इस दौरान पंचायत मंत्री ने कहा कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के लिए सभी को आगे आना होगा।
सोमवार को शिक्षा निदेशालय के सभागार में पंचायती राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग एवं वन अनुसंधान संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से पंचायत प्रतिनिधियों एवं कार्मिकों के राज्य स्तरीय एक दिवसीय अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने शुभारंभ किया। कार्यशाला में विषय के विशेषज्ञों की ओर से अनुपयोगी भूमि के संवर्धन और पौधरोपण को लेकर व्यापक योजना के लिए विस्तार से जानकारी दी गई।
पंचायती राज एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हम ऐसे पौधों को ग्रामसभा स्तर पर लगाने का प्रयास करें जिनसे कम समय में उससे अधिक आए हो सके। पिरूल से कपड़ा बनाने का कार्य पंचायतें कर सकती हैं। पानी के स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए चाल-खाल को बनाने के लिए मनरेगा के तहत पंचायत स्तर पर कार्य किया जा सकता है।
पंचायत मंत्री ने कहा कि हमें प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना है और इसके लिए हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है। प्लास्टिक खाने से गाय और जंगली जानवरों की जान को भी हमेशा खतरा बना रहता है। इसलिए हमें अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी।
उन्होंने कहा कि केमिकल फर्टिलाइजर लगातार मिट्टी की ताकत को समाप्त कर रहा है। पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज पंजाब से स्पेशल ट्रेन चलती है,जिसे कैंसर एक्सप्रेस कहते हैं। कहीं ऐसा ना हो कि हर शहर से कैंसर एक्सप्रेस चलने लगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हम भी लगातार सशक्त विकल्पों की तलाश में लगे हैं।
मंत्री ने बताया कि हरिद्वार में जल्द ही एक विशाल सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के सभी ग्राम सभाओं के प्रधान,ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को बुलाया जाएगा।
इस अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न विकासखंड से आए ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित सचिव पंचायती राज नितेश झा, निदेशक बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ, उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी, वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ रेनू सिंह, जलागम परियोजना निदेशक नीना ग्रेवाल और डॉ मनोज पंत आदि मौजूद थे।

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