देहरादून
उत्तराखंड कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के देहरादून वाले घर ईडी ने सुबह सुबह छापा मारा है। इसके अलावा दिल्ली और चंडीगढ़ में भी छापेमारी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक 3 राज्यों के 16 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है।
पिछले साल भी पड़ा था छापा
हरक सिंह रावत के लिए अगस्त 2023 में भी बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई थी। जब विजिलेंस की टीम ने उनके बेटे के स्वामित्व वाले एक मेडिकल कॉलेज और एक पेट्रोल पंप पर छापा मारा है। बीजेपी की सरकार में वन मंत्री रहे हरक सिंह रावत राज्य में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
किस मामले में हो रही कार्रवाई?
मामला कॉर्बेट नेशनल पार्क के कौलागढ़ टाइगर रिजर्व में पाखरो सफारी के निर्माण में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। शंकरपुर में दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और देहरादून में अमरावती पेट्रोल पंप पर विजिलेंस की छापेमारी में कथित तौर पर सरकारी पैसे से खरीदे गए लगभग 15 लाख रुपये के दो जनरेटर जब्त किए गए थे।

राजनेतिक इतिहास
हरक सिंह रावत का राजनीतिक सफर बड़ा उथल पुथल वाला रहा है हरक सिंह रावत 1991 में पहली बार मंत्री थे। उत्तराखंड के बनने से पहले वे उत्तर प्रदेश सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने।उत्तराखंड में 2002 में भाजपा की एनडी तिवारी सरकार में उन्हें मंत्री पद का दर्जा मिला था। वही 2007 में हरक सिंह रावत नेता प्रतिपक्ष बने।2012 में हरीश रावत सरकार के दौरान हरक सिंह रावत को कृषि, चिकित्सा शिक्षा ,सैनिक कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया। 2017 में भाजपा सरकार में हरक सिंह रावत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
2022 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस जॉइन की जिसके बाद उनकी मुश्किलें बड़ी है ।

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