देहरादून
राजधानी की सदर तहसील में लेखपालों के 50 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद से पदों पर कोई भर्ती नहीं की गई है। पदों के खाली होने से कार्यरत लेखपालों को अतिरिक्त क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी र्गई, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड लेखपाल संघ देहरादून इकाई के अध्यक्ष सुंदर सिंह सैनी ने बताया कि 1981 में जनगणना हुई थी। इसके आधार पर 1983 में लेखपालों के लिए जनसंख्या क्षेत्र बनाए गए थे। कहा कि इन गोलों के अनुसार हर लेखपाल को कार्यक्षेत्र सौंपे गए थे। तब से अब तक देहरादून की आबादी सात से आठ गुना बढ़ गई, लेकिन लेखपालों के पदों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। जनसंख्या बढ़ती रही, लेकिन पद अभी भी 29 ही हैं। इनमें भी 16 पद खाली हैं। खाली पदों के कार्य लेखपालों को अतिरिक्त क्षेत्र के तौर पर दे दिए गए हैं। कहा कि लेखपालों को अतिरिक्त क्षेत्र सौंपने से सभी कार्य रुके हुए हैं।
उन्होंने बताया कि दाखिल खारिज, एमडीडीए, भू लेख कार्य समेत तमाम काम लंबे समय से नहीं हो रहे हैं। आमजन रोजाना शिकायतें लेकर तहसीलदार के पास आते हैं। पटवारी अतिरिक्त क्षेत्रों के काम में व्यस्त होने से क्षेत्र पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कई बार आमजन को लेखपाल की खोजबीन करनी होती है। कभी तो लेखपाल मिल जाते हैं तो कभी नहीं मिलते। कई बार लोगों को अपना काम कराने के लिए लेखपाल के घर जाना पड़ता है। कहा कि लेखपाल के पद भरने की मांग को लेकर हमारी यूनियन की ओर से कई बार डीएम और एसडीएम को पत्र सौंपा जा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस ही है।
बैठक हो चुकी है और नियुक्ति तो अवश्य ही की जाएगी। बाकी हर संभव प्रयास किया जा रहा, कि किसी प्रकार की समस्या नहीं हो।

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